तो कुछ और बात थी

तन्हा सफर में वो साथ होती तो कुछ और बात थी । अलविदा उसने हाथ हिलाकर बहुत दूर से ही कह दिया, दो पल के लिए वो आग़ोश में होती तो कुछ और बात थी । मेरी हर कहानी में ज़िक्र तेरा ही है, तेरे लबों पर भी मेरी बात होती तो कुछ और बात थी । मेरे ख़्वाबों का ताल्लुक़ सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरी यादों से है, मेरे इस रात की सहर न होती तो कुछ और बात थी। शब-ए-सुकूँ की तलाश मुझे एक मुद्दत से है, जिंदगी तेरे साथ बसर होती तो कुछ और बात थी । इस मौसम में तुझको भूलना भी मुमकिन नहीं, ये जालिम बरसात न होती तो कुछ और बात थी।

–    आदित्य नारायण सिंह